एनलोन हेल्थकेयर लिमिटेड गुजरात के राजकोट में स्थित एक केमिकल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी है। यह मुख्य रूप से फार्मास्यूटिकल इंटरमीडिएट्स (दवाओं के कच्चे माल) और एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) का उत्पादन करती है, जिनका उपयोग विभिन्न प्रकार के फार्मास्यूटिकल प्रोडक्ट्स, जैसे टैबलेट, कैप्सूल, सिरप, न्यूट्रास्यूटिकल्स, पर्सनल केयर और यहां तक कि पशु स्वास्थ्य उत्पादों को बनाने में होता है।
कंपनी के बारे में कुछ खास बातें:
उत्पादों का पोर्टफोलियो: कंपनी के पास 65 से अधिक व्यावसायिक उत्पाद हैं, 28 पायलट चरण में हैं, और 49 लैब टेस्टिंग चरण में हैं, जो इसके मजबूत आर एंड डी (अनुसंधान और विकास) पाइपलाइन को दर्शाता है। यह भारत में लॉक्सोप्रोफेन सोडियम डाइहाइड्रेट (जो गठिया और दर्द के इलाज में इस्तेमाल होता है) के कुछ गिने-चुने उत्पादकों में से एक है।
व्यवसाय मॉडल: एनलोन हेल्थकेयर सीधे उपभोक्ताओं को दवाएं नहीं बेचती है। इसके बजाय, यह बड़ी फार्मा कंपनियों को अपने एपीआई और इंटरमीडिएट्स की आपूर्ति करती है। कंपनी अपने ग्राहकों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार कस्टम केमिकल मैन्युफैक्चरिंग भी करती है।
अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति: कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय नियामकों जैसे ANVISA (ब्राजील), NMPA (चीन), और PMDA (जापान) से कुछ एपीआई के लिए अप्रूवल प्राप्त किए हैं। इसके अलावा, यह EU, रूस, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख बाजारों में भी अपने उत्पादों के लिए ड्रग मास्टर फाइल (DMF) दाखिल करती रही है।
वित्तीय प्रदर्शन: कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में अपने राजस्व और लाभ दोनों में वृद्धि देखी है। वित्तीय वर्ष 2025 में, कंपनी का राजस्व बढ़कर ₹120.46 करोड़ हो गया, जो वित्तीय वर्ष 2024 में ₹66.69 करोड़ था। इसी तरह, कंपनी का लाभ (PAT) वित्तीय वर्ष 2025 में बढ़कर ₹20.52 करोड़ हो गया।
जोखिम और चुनौतियां:
ग्राहक एकाग्रता: कंपनी का राजस्व कुछ ही ग्राहकों पर बहुत अधिक निर्भर करता है। वित्तीय वर्ष 2025 में, इसके लगभग 77.7% राजस्व शीर्ष 10 ग्राहकों से आया। किसी बड़े ग्राहक को खोने से कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
एकल विनिर्माण सुविधा: कंपनी का पूरा उत्पादन राजकोट, गुजरात में स्थित एक ही सुविधा से होता है। किसी भी व्यवधान, जैसे प्राकृतिक आपदा या नियामक मुद्दों से, कंपनी के संचालन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
प्रतिस्पर्धा: कंपनी को भारतीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों खिलाड़ियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।
आईपीओ का उद्देश्य: आईपीओ से प्राप्त धन का उपयोग कंपनी अपनी विनिर्माण सुविधा का विस्तार करने, कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने और कर्ज चुकाने के लिए करेगी।