रिलायंस एजीएम 2025 में मुकेश अंबानी का बड़ा बयान — भारत की तरक्की को कोई नहीं रोक सकता

रिलायंस इंडस्ट्रीज की 48वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में बोलते हुए, चेयरमैन मुकेश अंबानी ने भारत की आर्थिक प्रगति पर विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद, एक बात बिल्कुल साफ है कि भारत तरक्की की राह पर है और अब इसकी इस तरक्की को कोई नहीं रोक सकता।

भारत की अर्थव्यवस्था और भविष्य का विज़न

मुकेश अंबानी ने अपने भाषण में कहा कि भारत पहले ही दुनिया की शीर्ष चार अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि भारत की जीडीपी सभी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सबसे तेजी से बढ़ रही है। अंबानी ने कहा कि सही सुधारों और आधुनिक विनिर्माण क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित करने से, हमारी अर्थव्यवस्था सालाना 10% की दर से बढ़ सकती है, जिससे अगले दो दशकों में भारतीयों की प्रति व्यक्ति आय में चार से पांच गुना वृद्धि होगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत को किसी विदेशी मॉडल की नकल करने की जरूरत नहीं है, बल्कि वह अपना ‘इंडिया फर्स्ट’ मॉडल विकसित करने में सक्षम है।

जियो और एआई में बड़ी घोषणाएं

एजीएम में मुकेश अंबानी ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं, जिनमें जियो और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर विशेष ध्यान दिया गया।

  • जियो IPO: उन्होंने बताया कि जियो का आईपीओ 2026 की पहली छमाही में आएगा।
  • 50 करोड़ ग्राहक: जियो ने 50 करोड़ ग्राहकों का आंकड़ा पार कर लिया है, जिसमें 22 करोड़ से अधिक जियो ट्रू 5जी उपयोगकर्ता शामिल हैं।
  • एआई पर फोकस: अंबानी ने कहा कि एआई, क्लीन एनर्जी और जीनोमिक्स जैसी प्रौद्योगिकियां 21वीं सदी को परिभाषित करेंगी। उन्होंने एआई को ‘नई कामधेनु’ बताया और कहा कि रिलायंस गूगल और मेटा जैसी कंपनियों के साथ मिलकर भारत में एआई क्रांति लाने के लिए प्रतिबद्ध है। 

भू-राजनीतिक चुनौतियां और भारत की आत्मनिर्भरता

अंबानी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ती अनिश्चितता पर भी बात की। उन्होंने कहा कि दुनिया को यह अहसास हो रहा है कि संघर्ष से कोई नहीं जीतता और जब राष्ट्र सहयोग करते हैं तो व्यापार सुचारू रूप से चलता है। उन्होंने भारतीय व्यवसायों से एकजुट होने और आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया ताकि वे बाहरी झटकों से देश की रक्षा कर सकें। उन्होंने कहा कि भारत को प्रमुख प्रौद्योगिकियों, महत्वपूर्ण उद्योगों और वैश्विक अर्थव्यवस्था के अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अधिकतम सीमा तक आत्मनिर्भर बनना होगा।

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