अगर आप 15 सितंबर के बाद अपना आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करते हैं, तो यह एक विलंबित रिटर्न माना जाएगा और आप पर जुर्माना तथा कुछ अन्य शर्तें लागू होंगी।
आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत, यदि आप नियत तारीख के बाद ITR दाखिल करते हैं, तो आपको विलंब शुल्क देना होगा।
यदि आपकी कोई बकाया कर देयता है, तो आपको आयकर अधिनियम की धारा 234A के तहत बकाया राशि पर प्रति माह 1% की दर से साधारण ब्याज का भुगतान करना होगा। यह ब्याज ITR दाखिल करने की नियत तारीख के अगले दिन से वास्तविक फाइलिंग की तारीख तक लगाया जाता है।
घाटे को आगे ले जाना (Carry Forward of Losses): विलंबित रिटर्न दाखिल करने पर, आप पूंजीगत लाभ और व्यावसायिक आय से होने वाले घाटे को अगले वर्षों में समायोजित (set off) करने के लिए आगे नहीं ले जा सकते। हालांकि, गृह संपत्ति से हुए घाटे को आगे ले जाने की अनुमति है
Income Tax Return: हो जाए सावधान ! ITR भरने में इस गलती से हो सकती है जेल ! यह वीडियो बताता है कि विलंबित आईटीआर दाखिल करने से क्या परिणाम हो सकते हैं, जिसमें जुर्माना और कारावास भी शामिल है।
Income Tax Return: हो जाए सावधान ! ITR भरने में इस गलती से हो सकती है जेल !। ITR Filling
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