अगर आप 15 सितंबर के बाद अपना आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करते हैं, तो यह एक विलंबित रिटर्न माना जाएगा और आप पर जुर्माना तथा कुछ अन्य शर्तें लागू होंगी।

विलंब शुल्क (Late Fee)
आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत, यदि आप नियत तारीख के बाद ITR दाखिल करते हैं, तो आपको विलंब शुल्क देना होगा।
- यदि आपकी कुल आय ₹5 लाख से अधिक है, तो जुर्माना ₹5,000 है।
- यदि आपकी कुल आय ₹5 लाख तक है, तो जुर्माना ₹1,000 है।
ब्याज का भुगतान (Payment of Interest)
यदि आपकी कोई बकाया कर देयता है, तो आपको आयकर अधिनियम की धारा 234A के तहत बकाया राशि पर प्रति माह 1% की दर से साधारण ब्याज का भुगतान करना होगा। यह ब्याज ITR दाखिल करने की नियत तारीख के अगले दिन से वास्तविक फाइलिंग की तारीख तक लगाया जाता है।
अन्य महत्वपूर्ण शर्तें (Other Important Conditions)
घाटे को आगे ले जाना (Carry Forward of Losses): विलंबित रिटर्न दाखिल करने पर, आप पूंजीगत लाभ और व्यावसायिक आय से होने वाले घाटे को अगले वर्षों में समायोजित (set off) करने के लिए आगे नहीं ले जा सकते। हालांकि, गृह संपत्ति से हुए घाटे को आगे ले जाने की अनुमति है
- कुछ कटौतियों का लाभ नहीं (Loss of Certain Deductions): समय पर ITR दाखिल न करने पर आप कुछ कटौतियों, जैसे कि धारा 80IA, 80IB, और 80IE के तहत मिलने वाले लाभों को खो सकते हैं।
- संशोधित रिटर्न का विकल्प (Option to File Revised Return): विलंबित रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 है (आकलन वर्ष 2025–26 के लिए)। यदि आप इस तिथि को भी चूक जाते हैं, तो आप ITR-U (अपडेटेड रिटर्न) दाखिल कर सकते हैं, लेकिन इस पर अतिरिक्त कर और जुर्माना लगेगा।
Income Tax Return: हो जाए सावधान ! ITR भरने में इस गलती से हो सकती है जेल ! यह वीडियो बताता है कि विलंबित आईटीआर दाखिल करने से क्या परिणाम हो सकते हैं, जिसमें जुर्माना और कारावास भी शामिल है।
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