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भारत में ऑनलाइन गेमिंग का दुर्भाग्य: हाइक का बंद होना एक बड़ी चेतावनी

नई दिल्ली: कविन मित्तल के मैसेजिंग ऐप ‘हाइक’ के बंद होने का हालिया फैसला, जो बाद में रियल-मनी गेमिंग (RMG) प्लेटफॉर्म ‘रश’ बन गया था, भारत के तेजी से बढ़ते ऑनलाइन गेमिंग उद्योग के लिए एक बड़ा झटका है। एक ऐसे समय में जब यह उद्योग वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा था, सरकार के कड़े नियमों और प्रतिबंधों ने इसे एक कठिन मोड़ पर ला खड़ा किया है।

एक मैसेजिंग ऐप से गेमिंग पावरहाउस तक का सफर

साल 2012 में जब कविन भारती मित्तल ने हाइक मैसेंजर लॉन्च किया था, तो इसका मकसद भारत में व्हाट्सएप को टक्कर देना था। आकर्षक स्टिकर और भारतीय भाषाओं के समर्थन के साथ, इसने लाखों उपयोगकर्ताओं को आकर्षित किया। हालांकि, व्हाट्सएप की बढ़ती लोकप्रियता और बाजार में प्रतिस्पर्धा के कारण, 2021 में हाइक ने अपनी मैसेजिंग सेवाओं को बंद करने का फैसला किया।

इसके बाद, कंपनी ने खुद को एक नए अवतार में पेश किया: ‘रश’, एक कैजुअल रियल-मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म। यह कदम बेहद सफल साबित हुआ। रश ने न केवल 1 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं को जोड़ा, बल्कि अपने ‘प्ले-टू-अर्न’ (खेलकर कमाओ) मॉडल के साथ भारी राजस्व भी अर्जित किया। कंपनी ने दावा किया कि उसने अपने खिलाड़ियों को लगभग $480 मिलियन (लगभग ₹3,950 करोड़) की विजेता राशि बांटी है। यह दर्शाता है कि यह व्यवसाय कितना बड़ा और लाभदायक था।

रियल-मनी गेमिंग पर प्रतिबंध और इसका प्रभाव

लेकिन भारत सरकार द्वारा रियल-मनी गेमिंग पर लगाए गए नए प्रतिबंधों ने इस सफलता पर पूर्ण विराम लगा दिया। ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 ने सभी प्रकार के पैसे वाले ऑनलाइन गेम्स पर एक व्यापक प्रतिबंध लगा दिया।

कविन मित्तल ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध उनकी कंपनी के लिए एक बड़ा जोखिम था। उनका कहना था कि वैश्विक स्तर पर विस्तार करने के लिए बहुत अधिक पूंजी और समय की आवश्यकता थी, खासकर जब भारत जैसे बड़े बाजार में ही व्यापार अनिश्चित हो गया हो। उन्होंने इसे “कठिन लेकिन आवश्यक” निर्णय बताया।

हाइक से आगे क्या?

हाइक का बंद होना सिर्फ एक कंपनी के अंत से बढ़कर है; यह भारत के ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर में नियामक अनिश्चितता का एक बड़ा उदाहरण है। कई अन्य छोटी और बड़ी गेमिंग कंपनियों को भी इसी तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

कविन मित्तल ने हालांकि हार नहीं मानी है। उन्होंने कहा कि उनका अगला लक्ष्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऊर्जा जैसे भविष्य के क्षेत्रों में नए प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित करना होगा। यह देखना बाकी है कि भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम इस प्रतिबंध से कैसे उबरता है और क्या सरकार उद्योग के लिए एक स्पष्ट और स्थिर नीति लेकर आती है।

Ankur singh

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