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ब्लैकबक का बेंगलुरु के ORR से बाहर निकलना: क्या यह केवल ट्रैफिक की समस्या है?

ब्लैकबक (BlackBuck) के सह-संस्थापक राजेश याबाजी का बेंगलुरु के आउटर रिंग रोड (ORR) पर स्थित अपने कार्यालय को बंद करने का फैसला सिर्फ एक कंपनी का कदम नहीं है, बल्कि यह एक बड़े और गंभीर मुद्दे को दर्शाता है। यह दिखाता है कि भारत की आईटी राजधानी कहलाने वाला बेंगलुरु अपने बुनियादी ढांचे को बनाए रखने में किस तरह संघर्ष कर रहा है।

समस्या की जड़ें

  • असहनीय ट्रैफिक: याबाजी ने अपने X पोस्ट में बताया कि उनके कर्मचारियों का एक तरफ का औसत आवागमन समय डेढ़ घंटे से भी ज्यादा हो गया है। यह न सिर्फ कर्मचारियों के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, बल्कि कंपनी की उत्पादकता पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ता है। ORR का 17 किलोमीटर का हिस्सा शहर के सबसे महत्वपूर्ण आईटी गलियारों में से एक है, जहां लगभग 10 लाख लोग 500 से अधिक कंपनियों में काम करते हैं। इसके बावजूद, यह इलाका लगातार ट्रैफिक जाम, सड़कों पर गड्ढों और धीमी गति से चल रहे निर्माण कार्यों से जूझ रहा है।
  • गड्ढों और धूल से भरी सड़कें: याबाजी ने सड़कों की जर्जर हालत को भी उजागर किया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में “गड्ढों और धूल से भरी सड़कें” का जिक्र किया, और सबसे बड़ी निराशा यह व्यक्त की कि अगले 5 वर्षों में स्थिति में सुधार की कोई उम्मीद नहीं दिखती। यह एक बड़ी चिंता है, क्योंकि यह बताता है कि यह केवल एक तात्कालिक समस्या नहीं है, बल्कि एक गहरी और दीर्घकालिक चुनौती है।
  • शासन की विफलता: पूर्व इंफोसिस सीएफओ मोहनदास पई जैसे कई उद्योग जगत के दिग्गजों ने ब्लैकबक के इस कदम को बेंगलुरु में “शासन की एक बड़ी विफलता” बताया है। उन्होंने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। यह घटना सरकार की उन घोषणाओं के बावजूद हुई है, जिसमें सड़कों की मरम्मत के लिए 1,100 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।

क्या है ORR का महत्व?

ORR, विशेष रूप से बेलंदूर-मराठाहल्ली-केआर पुरम का हिस्सा, बेंगलुरु के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्र है। यह शहर के कुल आईटी राजस्व में 36% का योगदान करता है। यहां कई प्रमुख वैश्विक और भारतीय आईटी कंपनियों के कार्यालय हैं। जब एक कंपनी इस महत्वपूर्ण क्षेत्र को छोड़ती है, तो यह बेंगलुरु की प्रतिष्ठा पर सवाल उठाता है और यह दर्शाता है कि अब बुनियादी ढांचा व्यापार के संचालन में एक बड़ी बाधा बन रहा है।

यह घटना बेंगलुरु के उन लाखों कर्मचारियों की आवाज बन गई है, जो हर दिन ट्रैफिक और खराब सड़कों के कारण तनाव और थकान का सामना करते हैं। यह सरकार और नागरिक निकायों के लिए एक चेतावनी है कि अगर बुनियादी ढांचे में सुधार नहीं किया गया, तो यह शहर के विकास और निवेश के माहौल को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

Ankur singh

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