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डिव एक्सेलेरेटर (Dev Accelerator) IPO: पहले दिन ही निवेशकों की जबरदस्त मांग

डिव एक्सेलेरेटर का आईपीओ 10 सितंबर 2025 को सदस्यता के लिए खुला और 12 सितंबर 2025 को बंद होगा। यह ₹143.35 करोड़ का बुक बिल्ड इश्यू है, जिसमें पूरी तरह से 2.35 करोड़ शेयरों का नया इश्यू शामिल है।

आईपीओ का विवरण

  • प्राइस बैंड: ₹56 से ₹61 प्रति शेयर।
  • लॉट साइज: 235 शेयर, जिसकी न्यूनतम खुदरा निवेश राशि ₹14,335 है।
  • अलॉटमेंट की तारीख: 15 सितंबर 2025 (संभावित)।
  • लिस्टिंग की तारीख: 17 सितंबर 2025 (संभावित)।
  • लिस्टिंग: बीएसई और एनएसई पर।

कंपनी का व्यवसाय मॉडल

डिव एक्सेलेरेटर एक फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस प्रोवाइडर है, जो विभिन्न कंपनियों को मैनेज्ड ऑफिस सॉल्यूशंस, को-वर्किंग स्पेस और डिज़ाइन-बिल्ड सेवाएं प्रदान करता है। कंपनी टियर-1 और टियर-2 दोनों शहरों में काम करती है और इसका लक्ष्य बड़े कॉरपोरेट्स और एसएमई को सेवा देना है।

कंपनी की प्रमुख ताकतें इस प्रकार हैं:

  • लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट: कंपनी अपने क्लाइंट्स को 5 से 9 साल की लीज और 3 से 5 साल के लॉक-इन पीरियड के साथ मैनेज्ड ऑफिस स्पेस प्रदान करती है, जिससे राजस्व की स्थिरता बनी रहती है।
  • उच्च ऑक्यूपेंसी दर: कंपनी की ऑक्यूपेंसी दर (Occupancy Rate) वित्तीय वर्ष 2025 में 87% थी, जो उद्योग में सबसे ज्यादा में से एक है।
  • टियर-2 शहरों पर फोकस: कंपनी ने टियर-2 शहरों में अपनी एक मजबूत स्थिति बना ली है, जहां लचीले वर्कस्पेस की मांग तेजी से बढ़ रही है।

निवेश से जुड़े जोखिम

हालांकि, आईपीओ में निवेश से पहले कुछ जोखिमों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है:

  1. वित्तीय प्रदर्शन: कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2023 में ₹12.83 करोड़ का नुकसान दर्ज किया था। हालांकि, वित्त वर्ष 2025 में इसने ₹1.74 करोड़ का मामूली लाभ दिखाया है। भविष्य में लाभप्रदता बनाए रखना एक चुनौती हो सकती है।
  2. उच्च मूल्यांकन (Valuation): आईपीओ का मूल्यांकन बहुत ज्यादा है। विश्लेषकों के अनुसार, ऊपरी प्राइस बैंड पर, कंपनी का मूल्यांकन वित्त वर्ष 2025 की आय के 305 गुना पर है, जो बहुत महंगा माना जाता है।
  3. उच्च कर्ज: कंपनी के पास काफी कर्ज है। वित्त वर्ष 2025 में कुल उधार ₹130.67 करोड़ था।
  4. लीज़ पर निर्भरता: कंपनी के सभी केंद्र किराए पर लिए गए हैं, और यह किसी भी संपत्ति की मालिक नहीं है। लीज अनुबंध समाप्त होने या किराए में बढ़ोतरी होने से व्यवसाय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  5. ग्राहक और उद्योग एकाग्रता: कंपनी का राजस्व कुछ ही बड़े ग्राहकों और आईटी/आईटीईएस (IT/ITES) जैसे कुछ विशिष्ट उद्योगों पर निर्भर करता है।
  6. प्रतिस्पर्धा: यह उद्योग अत्यधिक प्रतिस्पर्धी है, जिसमें Awfis और Smartworks जैसे बड़े खिलाड़ी शामिल हैं।
  7. कम रिटेल कोटा: रिटेल निवेशकों के लिए केवल 10% शेयर आरक्षित हैं, जिससे अलॉटमेंट मिलने की संभावना कम हो जाती है।

निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे इन जोखिमों और कंपनी के प्रदर्शन का पूरी तरह से मूल्यांकन करने के बाद ही निवेश का निर्णय लें।

Ankur singh

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